उनके लिए
कभी अपनों के लिए जीना था
तो कभी उनकी खुशियों के लिए
कभी सहारा देने के लिए जीना था
तो कभी उम्मीद देने के लिए
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| কলরব |
बतालती गई जरूरते वक्त के साथ
अब जीना था उनकी सपनो को सवारने के लिए
दिल में बात श्रीफ इतनी थी जितना मिले गम हमे
उससे ज्यादा खुशिया देनी थी
अपने लिए रक्खा क्या हम तो जी चुके थे
ये ज़िंदगी अब उनके लिए जो हमसे जुड़ चुके थे /

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